श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  1.17.190 
पुड़िल सकल दाड़ि, मुखे हैल व्रण ।
येइ पेयादा याय, तार एइ विवरण ॥190॥
 
 
अनुवाद
“‘मेरी दाढ़ी जल गई थी और मेरे गालों पर छाले पड़ गए थे।’ वहां गए हर अर्दली ने यही विवरण दिया।
 
"My beard burned and my cheeks blistered. Every orderly who went there gave the same description."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)