श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  1.17.174 
तुमि काजी - हिन्दु - धर्म - विरोधे अधिकारी ।
एबे ये ना कर माना बुझिते ना पारि ॥174॥
 
 
अनुवाद
"एक मुस्लिम मजिस्ट्रेट होने के नाते, आपको हिंदू रीति-रिवाजों के प्रदर्शन का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन अब आप उन पर रोक नहीं लगाते। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों है।"
 
"As a Muslim magistrate (Qazi), you might oppose the celebration of Hindu festivals, but now you don't stop them. I can't understand why."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)