श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  1.17.173 
तोमार नगरे हय सदा सङ्कीर्तन ।
वाद्य - गीत - कोलाहल, सङ्गीत, नर्तन ॥173॥
 
 
अनुवाद
"तुम्हारे शहर में हमेशा पवित्र नाम का सामूहिक जाप होता रहता है। संगीत, गायन और नृत्य का शोरगुल हमेशा चलता रहता है।
 
In your city, there is always the chanting of the holy name. There is always the sound of music, singing, and dancing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)