श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  1.17.170 
कल्पित आमार शास्त्र , - आमि सब जानि ।
जाति - अनुरोधे तबु सेइ शास्त्र मानि ॥170॥
 
 
अनुवाद
"मैं जानता हूं कि हमारे धर्मग्रंथ कल्पना और गलत विचारों से भरे हुए हैं, फिर भी, क्योंकि मैं एक मुसलमान हूं, मैं अपने समुदाय के लिए उन्हें स्वीकार करता हूं, भले ही उनका समर्थन अपर्याप्त हो।
 
“I know that our scriptures are full of imagination and fallacies, yet as a Muslim, for the sake of my community, I accept them despite their insufficient basis.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)