श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  1.17.165 
तोमरा जीयाइते नार , - वध - मात्र सार ।
नरक हइते तोमार नाहिक निस्तार ॥165॥
 
 
अनुवाद
"चूँकि तुम मुसलमान मारी गई गायों को ज़िंदा नहीं कर सकते, इसलिए तुम उनकी हत्या के ज़िम्मेदार हो। इसलिए तुम नर्क में जा रहे हो; तुम्हारी मुक्ति का कोई रास्ता नहीं है।"
 
"Since you Muslims cannot revive dead cows, you are responsible for their slaughter. Therefore, you are going to hell, and there is no way for you to attain salvation."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)