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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  1.17.155 
काजी कहे , - तोमार यैछे वेद - पुराण ।
तैछे आमार शास्त्र - केताब ‘कोराण’ ॥155॥
 
 
अनुवाद
काजी ने उत्तर दिया, "जैसे आपके पास वेद और पुराण नामक धर्मग्रंथ हैं, वैसे ही हमारे पास भी अपना धर्मग्रंथ है, जिसे पवित्र कुरान के नाम से जाना जाता है।
 
The Qazi replied, just as you have scriptures called Vedas and Puranas, we also have a holy scripture called the Quran.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु के शास्त्रों के आधार पर चर्चा करने के लिए चाँद काजी मान गए। वैदिक शास्त्र के अनुसार, यदि कोई अपनी स्थिति को वेदों से उद्धृत करके समर्थन कर सकता है, तो उसकी दलील सही है। उसी प्रकार, जब मुसलमान कुरान के उद्धरणों से अपनी स्थिति का समर्थन करते हैं, तो उनकी दलीलें भी अधिकृत होती हैं। जब भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने मुसलमानों द्वारा गाय और बैल की हत्या का प्रश्न उठाया, तो चाँद काजी अपने शास्त्रों की समझ के स्तर पर पहुँचे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)