श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  1.17.150 
भागिनार क्रोध मामा अवश्य सहय ।
मातुलेर अपराध भागिना ना लय ॥150॥
 
 
अनुवाद
"जब भांजा बहुत क्रोधित होता है, तो उसका मामा सहनशील होता है, और जब मामा कोई अपराध करता है, तो भांजा उसे बहुत गंभीरता से नहीं लेता।"
 
“When the nephew is very angry, the uncle tolerates it and when the uncle commits a crime, the nephew does not pay any attention to it.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)