श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  1.17.146 
काजी कहे - तुमि आइस क्रुद्ध हुइया ।
तोमा शान्त कराइते रहिनु लुकाइया ॥146॥
 
 
अनुवाद
काजी ने उत्तर दिया, "आप बहुत क्रोधित होकर मेरे घर आए हैं। आपको शांत करने के लिए मैं तुरंत आपके सामने नहीं आया, बल्कि अपने आपको छिपाए रखा।"
 
The Qazi said, "You have come to my house very angry. I could not immediately come before you to calm you down, but instead hid myself."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)