श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  1.17.131 
घरे गिया सब लोक करये कीर्तन ।
काजीर भये स्वच्छन्द नहे, चमकित मन ॥131॥
 
 
अनुवाद
घर लौटकर सभी नागरिक संकीर्तन करने लगे, लेकिन काजी के आदेश के कारण वे निश्चिंत नहीं थे, बल्कि हमेशा चिंता से भरे रहते थे।
 
All the citizens returned home and began chanting, but because of the Qazi's orders, they were not free from worries; they were always surrounded by anxiety.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)