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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  1.17.124 
शुनिया ये क्रुद्ध हैल सकल यवन ।
काजी - पाशे आ सि’ सबे कैल निवेदन ॥124॥
 
 
अनुवाद
हरे कृष्ण मंत्र की गूंज सुनकर स्थानीय मुसलमान बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने काजी से शिकायत की।
 
Hearing the resounding sound of the Hare Krishna mantra, the local Muslims became extremely angry and complained to the Qazi.
तात्पर्य
फौजदार या सिटी मजिस्ट्रेट को काज़ी (काजी) कहा जाता था। जमीदार या भूमिपति (मंडलरास) भूमि पर कर लगाते थे, लेकिन क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना और अपराधियों को दंडित करना काजी का कर्तव्य था। काज़ी और ज़मींदार दोनों बंगाल के गवर्नर के नियंत्रण में थे, जिसे उस समय सुबा-बांग्ला के नाम से जाना जाता था। नादिया, इस्लामपुरा और बागोयाना के जिले ज़मींदार हरि होडा या उनके वंशज होडा कृष्णदास के अधीन थे। ऐसा कहा जाता है कि चाँद काज़ी नवाब हुसैन शाह के आध्यात्मिक गुरु थे। एक मत के अनुसार उनका नाम मौलाना सिराजुद्दीन था और दूसरी राय के अनुसार उनका नाम हबीबारा रहमान था। चाँद काजी के वंशज अभी भी मायापुर के आसपास रहते हैं। लोग आज भी चाँद काजी के मकबरे को देखने आते हैं, जो एक चंपक पेड़ के नीचे है और इसे चाँद काज़ी की समाधि के रूप में जाना जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)