श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  1.17.122 
‘हरये नमः, कृष्ण यादवाय नमः ।
गोपाल गोविन्द राम श्री - मधुसूदन’ ॥122॥
 
 
अनुवाद
[सभी भक्तों ने हरे कृष्ण महा-मंत्र के साथ इस लोकप्रिय गीत को गाया।] "हरये नम:, कृष्ण यादवाय नम:/ गोपाल गोविंद राम श्री-मधुसूदन।"
 
[All the devotees started singing this popular song along with Hare Krishna Mahamantra] “Harye Namah Krishna Yadvay Namah / Gopal Govind Ram Shri Madhusudan.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)