श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  1.17.120 
एइ - मत नृत्य हइल चारि प्रहर ।
सन्ध्याय गङ्गा - स्नान क रि’ सबे गेला घर ॥120॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे बारह घंटे तक लगातार नृत्य करते रहे और शाम को वे सभी गंगा में स्नान करके अपने घर लौट आये।
 
In this way they continued dancing for twelve hours and after taking bath in the Ganga in the evening, they went to their respective homes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)