जल पान करिया नाचे ह ञा विह्वल ।
यमुनाकर्षण - लीला देखये सकल ॥117॥
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अनुवाद
जल पीने के बाद, भगवान चैतन्य इतने आनंदित हो गए कि नाचने लगे। इस प्रकार सभी ने यमुना नदी को आकर्षित करने की लीला देखी।
After drinking the water, Lord Chaitanya became so ecstatic that he began dancing. Thus, everyone witnessed the Yamuna's attraction and play.
तात्पर्य
यमुनाकर्षण-लीला यमुना को आकर्षित करने का मनोरंजक प्रसंग है। एक दिन, श्री बलदेव चाहते थे कि यमुना नदी उनके सामने आए, लेकिन जब यमुना नदी ने मना कर दिया, तो उन्होंने अपना हल उठा लिया, एक नहर खोदना चाहते थे ताकि यमुना को वहाँ आने के लिए बाध्य होना पड़े। चूंकि श्री चैतन्य महाप्रभु बलदेव के मूल रूप हैं, इसलिए अपने उत्साह में उन्होंने सभी को शहद लाने के लिए कहा। इस तरह, वहां खड़े हुए सभी भक्तों ने यमुनाकर्षण-लीला को देखा। इस लीला में, बलदेव अपनी प्रेमिकाओं के साथ थे। वारुणी नामक शहद का पेय पीने के बाद, वह यमुना में कूदना चाहते थे और लड़कियों के साथ तैरना चाहते थे। श्रीमद्-भागवतम (10.65.25-30, 33) में कहा गया है कि भगवान बलदेव ने यमुना को पास आने के लिए कहा, और जब नदी ने भगवान के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया, तो वह क्रोधित हो गए और इस प्रकार अपने हल से उसे अपने पास खींचना चाहा। हालाँकि, यमुना, भगवान बलराम के क्रोध से बहुत भयभीत थी, तुरंत उनके पास आई और उन्हें आत्मसमर्पण कर दिया, भगवान, सर्वोच्च व्यक्तित्व, से प्रार्थना की और अपनी गलती स्वीकार की। तब वह माफ की गई थी। यह यमुनाकर्षण-लीला का सार है। इस घटना का वर्णन जयदेव गोस्वामी की दस अवतारों से संबंधित प्रार्थना में भी मिलता है: वहसि वपुषि विसदे वसनं जलदाभं हालहति-भीति-मिलिता-यमुनाभम केशव धृता-हलधर-रूप जय जगद-ईश हरि
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥