श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  1.17.107 
बलिते ना पारे किछु, मौन हइल ।
प्रभु पुनः प्रश्न कैल, कहिते लागिल ॥107॥
 
 
अनुवाद
ज्योतिषी आश्चर्यचकित होकर चुप हो गया, कुछ बोल नहीं पाया। लेकिन जब भगवान ने पुनः उससे प्रश्न पूछा, तो उसने इस प्रकार उत्तर दिया।
 
The astrologer was astonished and remained silent. He could not speak. But when Mahaprabhu asked the same question again, he replied in this way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)