श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  1.16.94 
शास्त्रेर विचार भाल - मन्द नाहि जानि ।
सरस्वती ये बलाय, सेइ बलि वाणी ॥94॥
 
 
अनुवाद
"प्रिय महोदय, मुझे नहीं पता कि कौन सी रचना अच्छी है और कौन सी बुरी। लेकिन मैंने जो कुछ भी कहा है, उसे माँ सरस्वती ने ही कहा है।"
 
"O Sir, I do not know what is good and what is bad. But whatever I have said should be considered as spoken by Mother Saraswati."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)