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अनुवाद
"इस बालक ने मेरी बुद्धि को अवरुद्ध कर दिया है। अतः मैं समझ सकता हूँ कि माँ सरस्वती मुझ पर क्रोधित हो गई हैं।"
"This little boy has blocked my intellect. Therefore, I understand that Goddess Saraswati is angry with me."
तात्पर्य
भगवद्-गीता में स्पष्ट रूप से कहा है कि समस्त बुद्धि ईश्वर से ही प्राप्त होती है, जो प्रत्येक के हृदय में परमात्मा के रूप में स्थित हैं। परमात्मा ने उस पण्डित को बुद्धि दी कि वह समझ जाए कि चूँकि वह अपनी विद्या पर अभिमान करता था और स्वयं भगवान को भी हराना चाहता था, इसलिए भगवान की इच्छा से और माँ सरस्वती के माध्यम से उसे हराया गया था। इसलिए, मनुष्य को अपनी स्थिति पर इतना अभिमान नहीं करना चाहिए। भले ही कोई अत्यधिक विद्वान हो, उसकी विद्या के बावजूद यदि वह भगवान के चरण-कमलों का अपमान करता है तो वह सही प्रकार से नहीं बोल पाएगा। हम हर दृष्टि से नियंत्रित हैं। इसलिए, हमारा कर्तव्य तो केवल यही है कि हम भगवान के चरण-कमलों की शरण में रहें और झूठा अभिमान न करें। माँ सरस्वती ने यह परिस्थिति उस प्रधान पण्डित के अनुरूप निर्मित की जिससे वह भगवान चैतन्य महाप्रभु के समक्ष आत्म-समर्पण कर सके।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥