vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ
»
श्लोक 88
श्लोक
1.16.88
कहिते चाहये किछु, ना आइसे उत्तर ।
तबे विचारये मने हइया फाँफर ॥88॥
अनुवाद
वह कुछ कहना चाहता था, पर उसके मुँह से कोई जवाब नहीं निकला। फिर वह मन ही मन इस पहेली पर विचार करने लगा।
He wanted to say something, but nothing came out of his mouth. Then he began to ponder this dilemma in his mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×