श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.16.88 
कहिते चाहये किछु, ना आइसे उत्तर ।
तबे विचारये मने हइया फाँफर ॥88॥
 
 
अनुवाद
वह कुछ कहना चाहता था, पर उसके मुँह से कोई जवाब नहीं निकला। फिर वह मन ही मन इस पहेली पर विचार करने लगा।
 
He wanted to say something, but nothing came out of his mouth. Then he began to ponder this dilemma in his mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)