श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  1.16.66 
‘विभवति’ क्रियाय वाक्य - साङ्ग, पुनः विशेषण ।
‘अद्भुत - गुणा’ - एइ पुनरात्त दूषण ॥66॥
 
 
अनुवाद
"विभवति शब्द से कथन पूर्ण है। इसे अद्भुत गुण विशेषण से योग्य बनाने पर अतिरेक का दोष उत्पन्न होता है।"
 
The statement made using the word "vibhavati" (flourishes) is complete. However, using the adjective "adbhuta" (amazing) creates the flaw of repetition.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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