श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.16.43 
झञ्झावात - प्राय आमि श्लोक पड़िल ।
तार मध्ये श्लोक तुमि कैछे कण्ठे कैल ॥43॥
 
 
अनुवाद
"मैंने तो सभी श्लोकों को बहती हुई हवा की तरह सुनाया। आप उनमें से एक भी श्लोक को पूरी तरह से कैसे याद कर पाए?"
 
"I recited all the verses at the speed of a storm. How did you manage to memorize this one verse so well?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)