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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.16.38 
तोमार कविता श्लोक बुझिते कार शक्ति ।
तुमि भाल जान अर्थ किंवा सरस्वती ॥38॥
 
 
अनुवाद
“आपकी कविता इतनी कठिन है कि इसे आपके और विद्या की देवी माँ सरस्वती के अलावा कोई नहीं समझ सकता।
 
“Your poem is so difficult that no one except you and Goddess Saraswati, the goddess of knowledge, can understand it.”
तात्पर्य
केशव कश्मीरी का व्यंग्यात्मक जवाब देते हुए, भगवान चैतन्य महाप्रभु ने अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कविता के मूल्य को कम करते हुए कहा, "हां, आपकी रचनाएँ इतनी सुंदर हैं कि आपके और आपकी पूजनीय माता, विद्या की देवी, के अलावा कोई उन्हें समझ ही नहीं सकता।" केशव कश्मीरी विद्या की देवी माँ सरस्वती के प्रिय भक्त थे, लेकिन चैतन्य महाप्रभु, विद्या की देवी के स्वामी के रूप में, उनके भक्तों के बारे में व्यंग्यात्मक रूप से बोलने का अधिकार रखते हैं। दूसरे शब्दों में, हालांकि केशव कश्मीरी को विद्या की देवी का प्रिय होने पर गर्व था, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि वह स्वयं चैतन्य महाप्रभु द्वारा नियंत्रित हैं क्योंकि वह भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)