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अनुवाद
विरहरूपी सर्प ने लक्ष्मीदेवी को डस लिया और उसके विष से उनकी मृत्यु हो गई। इस प्रकार वे परलोक सिधार गईं। वे अपने घर, भगवान के धाम वापस चली गईं।
The snake of separation bit Lakshmi Devi, and she died from its poison. Thus, she departed for the afterlife—she returned to the abode of God.
तात्पर्य
जैसा कि भगवद गीता (8.6) में कहा गया है, यां यां वाऽपि स्मरन् भावं त्यजत्यन्ते कलेवरं: जिन्दगी भर जिस भाव में रहकर कोई विचार करता है, मृत्यु के समय उसके विचारों की गुणवत्ता वैसी ही होती है और इसलिए मृत्यु के बाद वह उसी स्तर का शरीर पाता है। इस सिद्धांत के अनुसार, वैकुण्ठ से आई लक्ष्मीदेवी, जो भगवान् की याद में ही लीन रहती थीं, निश्चित रूप से मृत्यु के बाद वैकुण्ठलोक वापस चली गई होंगी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥