प्रभु तुष्ट हञा साध्य - साधन कहिल ।
नाम - सङ्कीर्तन कर, - उपदेश कैल ॥15॥
अनुवाद
भगवान संतुष्ट होकर उसे जीवन का उद्देश्य और उसकी प्राप्ति की विधि बतायी। उन्होंने बताया कि सफलता का मूल सिद्धांत भगवान के पवित्र नाम [हरे कृष्ण महामंत्र] का जप करना है।
Mahaprabhu was pleased and taught him the purpose of life and how to achieve it. He taught that the key to success was chanting the holy name of the Lord (Hare Krishna mantra).
तात्पर्य
कृष्णभावनामृत आंदोलन इसी निर्देश पर आधारित है कि भगवान चैतन्य महाप्रभु ने कहा कि हर व्यक्ति को नियमित रूप से एवं निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार हरि कृष्ण महामंत्र का जाप करना चाहिए। हम तो अपने पाश्चात्य अनुयायियों से बस यही कहते हैं कि वे दिन में कम से कम सोलह फेरे जपें, लेकिन कई बार हम देखते हैं कि वे यह सोलह फेरे का जप भी नहीं कर पाते और इसके स्थान पर बहुत-सी कठोर पुस्तकें और एक ऐसी पूजा पद्धति लाते हैं जो उनका ध्यान अनेक प्रकार से भटकाती है। श्री चैतन्य महाप्रभु का संप्रदाय हरि कृष्ण मंत्र के जप पर आधारित है। पहले तो भगवान चैतन्य ने तपन मिश्र को यही सलाह दी थी कि वे अपना ध्यान इसी जप पर केन्द्रित करें। हम जो कृष्णभावनामृत आंदोलन के सदस्य हैं, हमें चैतन्य महाप्रभु की इस सलाह का सख्ती से पालन करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)