श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.16.12 
स्वप्ने एक विप्र कहे , - शुनह तपन ।
निमाजि - पण्डित पाशे करह गमन ॥12॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भ्रमित होकर तपन मिश्र को एक ब्राह्मण ने स्वप्न में निमाई पंडित [चैतन्य महाप्रभु] के पास जाने का निर्देश दिया।
 
Thus, Tapan Mishra, who was infatuated, was instructed by a Brahmin in his dream to go to Nimai Pandit (Chaitanya Mahaprabhu).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)