श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.16.104 
आजि वासा’ याह, कालि मिलिब आबार ।
शुनिब तोमार मुखे शास्त्रेर विचार ॥104॥
 
 
अनुवाद
“कृपया घर वापस जाइये, और कल हम पुनः मिलेंगे ताकि मैं आपके मुख से शास्त्रों पर प्रवचन सुन सकूँ।”
 
"Please go home. We'll meet again tomorrow so I can hear you discuss the scriptures."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)