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श्लोक 101
श्लोक
1.16.101
भवभूति, जयदेव, आर कालिदास ।
ताँ - सबार कवित्वे आछे दोषेर प्रकाश ॥101॥
अनुवाद
“भवभूति, जयदेव और कालिदास जैसे महान कवियों की काव्य रचनाओं में भी दोषों के अनेक उदाहरण हैं।
“There are many flaws in the poetry of great poets like Bhavabhuti, Jayadeva and Kalidasa.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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