vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ
»
श्लोक 100
श्लोक
1.16.100
तोमार कवित्व येन गङ्गा - जल - धार ।
तोमा - सम कवि कोथा नाहि देखि आर ॥100॥
अनुवाद
"आपकी काव्य-कला गंगा के अविरल प्रवाह के समान है। मुझे संसार में कोई ऐसा नहीं मिलता जो आपकी बराबरी कर सके।"
"Your poetic talent is like the ever-flowing waters of the Ganges. I can think of no one in the world who can match you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×