श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  1.16.100 
तोमार कवित्व येन गङ्गा - जल - धार ।
तोमा - सम कवि कोथा नाहि देखि आर ॥100॥
 
 
अनुवाद
"आपकी काव्य-कला गंगा के अविरल प्रवाह के समान है। मुझे संसार में कोई ऐसा नहीं मिलता जो आपकी बराबरी कर सके।"
 
"Your poetic talent is like the ever-flowing waters of the Ganges. I can think of no one in the world who can match you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)