पूर्व - सिद्ध भाव दुँहार उदय करिल ।
दैवे वनमाली घटक शची - स्थाने आइल ॥29॥
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अनुवाद
जब भगवान और लक्ष्मीदेवी का मिलन हुआ, तो उनका सम्बन्ध जागृत हो गया, जो पहले से ही निश्चित था, और संयोगवश विवाहकर्ता वनमाली शचीमाता से मिलने आये।
When Mahaprabhu and Lakshmi Devi met, their relationship, which had already been fixed, was awakened and coincidentally Vanmali, the marriage arranger (Ghatak), came to meet Shachimata.
तात्पर्य
श्री चैतन्यदेव की लीला में विवाह-माध्यम्य करनेवाले वनमाली घटाक नामक काष्ठपरिवर्ती ब्राह्मण थे, जो नबद्वीप के निवासी थे। पूर्व में वे विश्वामित्र थे, जिन्होंने श्री रामचन्द्रजी का विवाह-माध्यम्य किया था और परवर्ती जन्म में वे ब्राहमण हुए थे, जिन्होंने श्री कृष्ण का रुक्मणी के साथ विवाह-माध्यम्य किया था। चैतन्य लीला में वही ब्राहमण विवाह के माध्यम बने।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥