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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 15: महाप्रभु की पौगण्ड-लीलाएँ
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श्लोक 17
श्लोक
1.15.17
आस्ते - व्यस्ते पिता - माता मुखे दिल पानि ।
सुस्थ हञा कहे प्रभु अपूर्व काहिनी ॥17॥
अनुवाद
जब उनके माता-पिता ने शीघ्रता से उनके मुंह पर जल छिड़का, तो प्रभु होश में आये और उन्होंने कुछ अद्भुत बातें कहीं जो उन्होंने पहले कभी नहीं सुनी थीं।
When his parents hurriedly sprinkled water on his face, he regained consciousness and told something astonishing as they had never heard before.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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