श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.14.95 
बाल्यलीला - सूत्र एइ कैल अनुक्रम ।
इहा विस्तारियाछेन दा स - वृन्दावन ॥95॥
 
 
अनुवाद
यह भगवान चैतन्य महाप्रभु की बाल लीलाओं का सार है, जिसे कालानुक्रमिक क्रम में प्रस्तुत किया गया है। वृंदावन दास ठाकुर ने अपने ग्रंथ चैतन्य-भागवत में इन लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया है।
 
This is an outline of Sri Chaitanya Mahaprabhu's childhood pastimes, presented here in chronological order. Vrindavana Dasa Thakura has already described these pastimes in detail in his book, Chaitanya Bhagavata.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)