श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  1.14.93 
एइ मत शिशु - लीला करे गौरचन्द्र ।
दिने दिने पिता - मातार बाड़ाय आनन्द ॥93॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार गौरहरि ने अपनी बाल लीलाएँ कीं और दिन-प्रतिदिन अपने माता-पिता के सुख में वृद्धि की।
 
In this way Gaurahari completed his childhood pastimes and day by day he continued to increase the joy of his parents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)