एइ - मते दुँहे करेन धर्मेर विचार ।
विशुद्ध - वात्सल्य मिशेर, नाहि जाने आर ॥90॥
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अनुवाद
इस प्रकार जगन्नाथ मिश्र और ब्राह्मण ने स्वप्न में धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा की, फिर भी जगन्नाथ मिश्र विशुद्ध पितृ-रस में लीन थे और कुछ भी जानना नहीं चाहते थे।
In this dream, Jagannath Mishra and the Brahmin continued to discuss religious matters. Yet, Jagannath Mishra remained immersed in pure affection and did not want to know anything else.
तात्पर्य
श्रीमद भागवतम् (10.8.45) में कहा गया है, "भगवान कृष्ण, भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व, जो सभी वेदों और उपनिषदों द्वारा और सात्विक सांख्य-योग के माध्यम से महान हस्तियों द्वारा आराधना किए जाते हैं, माता यशोदा और नंद द्वारा अपने छोटे बेटे के रूप में माना जाता था।" इसी तरह, जगन्नाथ मिश्रा ने भी भगवान चैतन्य महाप्रभु को अपना प्रिय छोटा लड़का माना, हालाँकि वे सभी श्रद्धा के साथ विद्वान ब्राह्मणों और संत लोगों द्वारा पूजा जाता हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥