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अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र ने कहा, "निश्चय ही बालक कृष्ण शालग्राम-शिला के पास हैं। वे अपना बालरूप धारण करके कमरे में खेल रहे हैं।"
Jagannatha Mishra said, "Certainly, the child Krishna is with the Shaligram stone. He is playing inside the room in his child form."
तात्पर्य
जब भगवान के स्वरूप को काष्ठ, पत्थर या किसी अन्य तत्व से तराशा जाता है, तो समझना चाहिए कि वहां परमेश्वर व्यक्तित्व रूप से उपस्थित होते हैं। तार्किक दृष्टि से भी हम समझ सकते हैं कि सभी भौतिक तत्व परमेश्वर की ऊर्जा के ही विस्तार हैं। चूँकि परमेश्वर का व्यक्तित्व रूप उनकी ऊर्जा से भिन्न नहीं है, इसलिए परमेश्वर हमेशा अपनी ऊर्जा में उपस्थित रहते हैं और भक्त की प्रबल इच्छा के कारण वे स्वयं को प्रकट करते हैं। चूँकि परमेश्वर सर्वोपरि शक्तिशाली हैं, इसलिए यह तर्कसंगत है कि वे अपनी ऊर्जा में स्वयं को प्रकट कर सकते हैं। देवता पूजा या शालिग्राम-शिला की पूजा मूर्ति पूजा नहीं है। एक शुद्ध भक्त के घर में भगवान का देवता ठीक उसी तरह कार्य कर सकता है जैसे वह अपने मूल आध्यात्मिक व्यक्तित्व में कार्य कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥