श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  1.14.86 
मिश्र कहे , - देव, सिद्ध, मुनि केने नय ।
ये से बड़ हउक् मात्र आमार तनय ॥86॥
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र ने उत्तर दिया, "यह बालक कोई देवता, कोई योगी या कोई महान संत हो सकता है। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वह क्या है, क्योंकि मैं तो उसे अपना ही पुत्र मानता हूँ।"
 
Jagannatha Mishra replied, "This boy may be a god, a yogi, or a saint. I don't care what he is, because I consider him my son."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)