vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ
»
श्लोक 84
श्लोक
1.14.84
रात्रे स्वप्न देखे , - एक आ सि’ ब्राह्मण ।
मिश्रेरे कहये किछु स - रोष वचन ॥84॥
अनुवाद
उसी रात जगन्नाथ मिश्र ने स्वप्न देखा कि एक ब्राह्मण उनके सामने आया और बड़े क्रोध में ये शब्द बोल रहा है:
That very night Jagannatha Mishra had a dream in which a Brahmin came and angrily said these words to him:
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×