श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  1.14.84 
रात्रे स्वप्न देखे , - एक आ सि’ ब्राह्मण ।
मिश्रेरे कहये किछु स - रोष वचन ॥84॥
 
 
अनुवाद
उसी रात जगन्नाथ मिश्र ने स्वप्न देखा कि एक ब्राह्मण उनके सामने आया और बड़े क्रोध में ये शब्द बोल रहा है:
 
That very night Jagannatha Mishra had a dream in which a Brahmin came and angrily said these words to him:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)