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श्लोक 82
श्लोक
1.14.82
मिश्र बले , - किछु हउक्, चिन्ता किछु नाइ ।
विश्वम्भरेर कुशल हउक्, - एइ मात्र चाइ ॥82॥
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र ने उत्तर दिया, "कोई बात नहीं। चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। विश्वम्भर का सदैव मंगल हो। मैं बस यही चाहता हूँ।"
Jagannath Mishra replied, "Don't worry about it. There's nothing to worry about.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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