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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.14.75 
इहा शुनि’ माताके कहिल ब्रह्म - ज्ञान ।
विस्मिता हइया माता कराइल स्नान ॥75॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भगवान चैतन्य महाप्रभु ने अपनी माता को परम ज्ञान का उपदेश दिया। इससे आश्चर्यचकित होकर, उनकी माता ने उन्हें स्नान करने के लिए विवश किया।
 
Hearing this, Chaitanya Mahaprabhu taught his mother the knowledge of Brahman. Although she was astonished, she still forced Mahaprabhu to take a bath.
तात्पर्य
भगवती यशोदा ने भगवान का सुनाया निरपेक्ष ज्ञान श्रील भक्तिविनोद ठाकुर ने अपने अमृत-प्रवाह-भाष्य में निम्न प्रकार से वर्णित किया है: 'भगवान ने कहा, 'माँ, यह शुद्ध है और यह अशुद्ध है, यह निश्चित रूप से सांसारिक भावना है जिसका तथ्य में कोई आधार नहीं है। तुमने भगवान विष्णु के लिए इन बर्तनों में खाना बनाया है और उन्हें उनको अर्पित किया है। तब ये बर्तन अछूत कैसे हो सकते हैं? विष्णु के संबंध में सभी वस्तुओं को विष्णु की ऊर्जाओं का विस्तार माना जाना चाहिए। अध्यात्म, विष्णु शाश्वत और अलिप्त हैं। तब ये बर्तन शुद्ध या अशुद्ध कैसे माने जा सकते हैं?' निरपेक्ष ज्ञान पर यह प्रवचन सुनकर, उनकी माँ बहुत आश्चर्यचकित हुईं और उन्हें स्नान करने के लिए मजबूर किया।'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)