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अनुवाद
“हे गोपियो, मैं तुम्हारी मुझे पति रूप में पाने की इच्छा को स्वीकार करता हूँ और इस प्रकार मेरी पूजा करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी यह इच्छा पूरी हो, क्योंकि यह पूरी होनी ही चाहिए।”
"O dear gopis, I accept your wish to become your husband and to worship me in this way. I wish that your wish be fulfilled, for it is worthy of being fulfilled."
तात्पर्य
कृष्ण की सहेलियाँ गोपियाँ लगभग उतनी ही उम्र की थीं, जितनी कि स्वयं श्रीकृष्ण की। और वे मन ही मन चाहती थीं कि कृष्ण उनके पति बनें। परन्तु लाज के मारे वे यह बात कह नहीं पाती थीं। इसलिए बाद में जब कृष्ण ने उनकी साड़ियाँ चुराईं तो उन्होंने गोपियों से कहा, "मैं तुम्हारे मन की बात समझ गया और उसको मैंने स्वीकार कर लिया है। मैंने तुम्हारी साड़ियाँ चुरा कर तुम सब को मेरे सामने एक तरह से नग्न प्रस्तुत किया है। इसका मतलब मैं तुम सब को अपनी पत्नियों के रूप में स्वीकार कर लेता हूँ।" कभी-कभी मूर्ख लोग भगवान के उद्देश्य या गोपियों के उद्देश्य को न जानते हुए, बिना सोचे-समझे अपनी बुद्धि से आलोचना करते रहते हैं। परन्तु वस्त्रहरण का वास्तविक उद्देश्य इस श्लोक में भगवान ने बतलाया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥