श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.14.61 
एइ मत चापल्य सब लोकेरे देखाय ।
दुःख कारो मने नहे, सबे सुख पाय ॥61॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान का लड़कियों के साथ यह धूर्त व्यवहार आम लोगों को ज्ञात हुआ, तो इससे उनके बीच कोई गलतफहमी पैदा नहीं हुई, बल्कि वे इस व्यवहार में आनंदित हुए।
 
When people learned of Mahaprabhu's cleverness towards girls, they had no misgivings. Rather, they were delighted by his behavior.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)