श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.14.6 
बाल्य - लीलाय आगे प्रभुर उत्तान शयन ।
पिता - माताय देखाइल चिह्न चरण ॥6॥
 
 
अनुवाद
अपनी पहली बाल लीलाओं में भगवान् शय्या पर लेटे हुए उलटे हो गये और इस प्रकार उन्होंने अपने माता-पिता को अपने चरणकमलों के चिह्न दिखाये।
 
In one of His first childhood pastimes, Mahaprabhu, lying on His bed, turned from top to bottom and thus showed His parents the marks of His lotus feet.
तात्पर्य
उठान शब्द का प्रयोग 'लेटी हुई अवस्था में बिस्तर पर श्रव्य या 'बिस्तर पर लेटी हुई अवस्था में' के लिए भी किया जाता है। कुछ ग्रन्थों में यह शब्द उत्थान है जिसका अर्थ है "खड़े होना।" अपने बाल्यकाल में प्रभु ने दीवार को पकड़ने और खड़े रहने का प्रयास किया, लेकिन जैसे कोई साधारण बालक गिर जाता है वैसे ही प्रभु भी गिर गये और फिर वे अपने बिस्तर पर लेट गये।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)