श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.14.57 
कोन कन्या पलाइल नैवेद्य लइया ।
तारे डाकि’ कहे प्रभु सक्रोध हइया ॥57॥
 
 
अनुवाद
जब कुछ लड़कियाँ भाग गईं, तो प्रभु ने क्रोधित होकर उन्हें बुलाया और उन्हें निम्नलिखित सलाह दी:
 
When some girls ran away with the offerings, Mahaprabhu became angry and called them and said this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)