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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  1.14.55 
पण्डित, विदग्ध, युवा, धन - धान्यवान् ।
सात सात पुत्र हबे - चिरायु, मतिमान् ॥55॥
 
 
अनुवाद
"वे विद्वान, चतुर और युवा होंगे और उनके पास प्रचुर धन-धान्य होगा। इतना ही नहीं, तुम दोनों के सात-सात पुत्र होंगे, जो सभी दीर्घायु होंगे और अत्यंत बुद्धिमान होंगे।"
 
"They will be learned, clever, young, and full of wealth and prosperity. Not only that, but each of you will have seven sons, who will live long and be extremely intelligent."
तात्पर्य
आमतौर पर एक युवा लड़की की यह महत्वाकांक्षा होती है कि उसके पास एक अच्छा पति हो जो विद्वान, चतुर, युवा और अमीर हो। वैदिक संस्कृति के अनुसार, वह व्यक्ति धनी होता है जिसके पास अनाज का बड़ा भंडार होता है और काफी संख्या में जानवर होते हैं। धन्येन धनवान गव्य धनवान: यदि किसी के पास अनाज, गायें और बैल हों तो वह धनी होता है। एक लड़की की यह भी इच्छा होती है कि उसके बहुत सारे बच्चे हों, विशेष रूप से पुत्र जो बहुत बुद्धिमान और दीर्घजीवी हों। आजकल समाज बिगड़ गया है और एक या दो बच्चों को जन्म देने और शेष को गर्भनिरोधक उपायों से मार डालने का प्रचार किया जा रहा है। लेकिन एक लड़की की स्वाभाविक महत्वाकांक्षा यह होती है कि उसके एक से अधिक बच्चे हों, बल्कि कम से कम आधे दर्जन तो हों ही।

उपासना के सामग्री के बदले, चैतन्य महाप्रभु ने लड़कियों की सभी महत्वाकांक्षाओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए उन्हें आशीर्वाद देना चाहा। भगवान चैतन्य महाप्रभु की उपासना करने से कोई भी आसानी से सुखी हो सकता है और एक अच्छे पति, धन, अनाज और अच्छे बच्चों जैसी भौतिक सुविधाएँ प्राप्त कर सकता है। हालाँकि श्री चैतन्य महाप्रभु ने अल्प आयु में ही संन्यास ले लिया था, उनके भक्तों के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे भी उनके पदचिन्हों पर चलते हुए संन्यास लें। कोई गृहस्थ रह सकता है, लेकिन उसे भगवान चैतन्य महाप्रभु का भक्त अवश्य होना चाहिए। तभी कोई सुखी होगा, अच्छे घर, अच्छे बच्चों, अच्छे साथी, अच्छे धन और अपनी इच्छानुसार हर चीज की भौतिक संपन्नता से युक्त होगा। इसलिए शास्त्र सलाह देते हैं, यज्ञैः संकीर्तन-प्रायैर् यजन्ति हि सुमेधसः (भाग. ११.५.३२)। इसलिए, हर गृहस्थ, जो वास्तव में बुद्धिमान है, उसे हर घर में संकीर्तन आंदोलन का प्रचार करना चाहिए और इस जीवन में शांतिपूर्ण तरीके से रहना चाहिए और अगले जन्म में भगवान के पास वापस जाना चाहिए।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)