श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.14.53 
आमा सबाकार पक्षे इहा करिते ना युयाय ।
ना लह देवता सज्ज, ना कर अन्याय ॥53॥
 
 
अनुवाद
"इसलिए आपको ऐसा करना उचित नहीं है। देवताओं की पूजा के लिए हमारी सामग्री न लें। इस प्रकार उपद्रव न करें।"
 
"So, it's not appropriate for you to do this. Don't take our worship materials. Don't cause such a disturbance."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)