कभु शिशु - सङ्गे स्नान करिल गङ्गाते ।
कन्यागण आइला ताहाँ देवता पूजिते ॥48॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
कभी-कभी भगवान अन्य बालकों के साथ गंगा स्नान करने जाते थे और पड़ोस की लड़कियाँ भी वहाँ विभिन्न देवताओं की पूजा करने आती थीं।
Sometimes Mahaprabhu would go to take bath in the river Ganga with other boys and girls from the neighbourhood would also come there to worship the deities.
तात्पर्य
वैदिक प्रणाली के अनुसार, जब दस या बारह वर्ष की छोटी लड़कियां स्नान करने गंगा के किनारे जाती थीं, तो वो विशेष तौर पर भगवान शिव जी की आराधना करती थीं और भविष्य में अच्छे पति पाने की प्रार्थना करती थीं। वो विशेष रूप से भगवान शिव जैसे पति पाना चाहती थीं क्योंकि भगवान शिव बहुत शांत और साथ ही सबसे शक्तिशाली हैं। इसलिए, पहले के समय में हिंदू परिवारों की छोटी लड़कियां भगवान शिव की पूजा करती थीं, विशेषकर वैशाख (अप्रैल-मई) के महीने में। गंगा में स्नान करना हर किसी के लिए बहुत सुखद होता है, न की केवल वयस्कों के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥