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अनुवाद
बचपन में भगवान को उनके घर के बाहर दो चोर उठाकर ले गए थे। लेकिन भगवान चोरों के कंधों पर चढ़ गए और जब वे सोच रहे थे कि वे बालक को सुरक्षित रूप से ले जाकर उनके आभूषण लूटने वाले हैं, भगवान ने उन्हें गुमराह कर दिया और इस प्रकार चोर अपने घर जाने के बजाय जगन्नाथ मिश्र के घर वापस आ गए।
As a child, Mahaprabhu was kidnapped by two thieves outside his home. However, Mahaprabhu climbed onto the thieves' shoulders, and while they were thinking they would easily take away the boy's jewelry, Mahaprabhu misled them, causing them to return to Jagannath Mishra's home instead of their own.
तात्पर्य
उनके बचपन में प्रभु को सोने-चाँदी के आभूषणों से खूब सजाया जाता था। एक बार की बात है, जब प्रभु घर के बाहर खेल रहे थे, तब गली से गुजरते हुए दो चोरों ने उन्हें लूटने का मौका देखा। उन्होंने कुछ मिठाइयाँ खिलाकर उन्हें खुश करते हुए अपने कंधों पर उठा लिया। चोरों ने सोचा कि वे बच्चे को जंगल में ले जाएँगे और फिर उसे मारकर आभूषण ले जाएँगे। हालाँकि, प्रभु ने चोरों पर अपनी मायावी ऊर्जा का विस्तार किया, इतना कि उसे जंगल में ले जाने के बजाय वे ठीक उसके घर के सामने वापस आ गए। जब वे अपने घर के सामने आए तो वे डर गए क्योंकि जगन्नाथ मिश्र के घर से हर कोई और उस मोहल्ले के सभी निवासी बच्चे की तलाश में व्यस्त थे। इसलिए चोरों ने वहाँ रहना खतरनाक समझकर वहाँ से चले गए और उसे छोड़ दिया। बच्चे को घर के अंदर लाया गया और माँ शची को दिया गया, जो बहुत चिंतित थीं, और वह संतुष्ट हो गईं। इस घटना को चैतन्य-भागवत के आदि-खंड के तीसरे अध्याय में भी बहुत विस्तार से बताया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥