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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.14.3 
प्रभुर कहिल एइ जन्मलीला - सूत्र ।
यशोदा - नन्दन यैछे हैल शची - पुत्र ॥3॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने संक्षेप में श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन का वर्णन किया है, जो माता शची के पुत्र के रूप में प्रकट हुए, ठीक उसी प्रकार जैसे कृष्ण माता यशोदा के पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे।
 
In this way I have briefly formulated the appearance of Sri Chaitanya Mahaprabhu, who appeared as the son of Shachimata in the same way as Sri Krishna appeared as the son of Mother Yashoda.
तात्पर्य
श्रील नरसिम्हा दास ठाकुर इस कथन की पुष्टि करते हैं कि अब माता यशोदा के पुत्र भगवान कृष्ण, माता शची के पुत्र के रूप में पुनः भगवान चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुए हैं:

व्रजेन्द्र नन्दाद येई शची सुत हेल सेई

बलराम हाइल नितै

"शची के पुत्र माता यशोदा और नंद महाराज के पुत्र के अलावा कोई नहीं है, और नित्यानंद प्रभु वही बलराम हैं।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)