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अनुवाद
भगवान ने अपने रोने के अनुरोध पर सभी महिलाओं से हरे कृष्ण महामंत्र का पवित्र नाम जपवाया, और जब वे जप करतीं तो भगवान मुस्कुराते रहते।
Mahaprabhu, under the pretext of crying, would force all the women to chant the Hare Krishna Mahamantra and when they did the kirtan, Mahaprabhu would keep smiling.
तात्पर्य
चैतन्य-भागवत में इस क्रीड़ा का वर्णन इस प्रकार है: "भगवान अपनी खूबसूरत आँखों से रोते थे, लेकिन हरे कृष्ण महामंत्र सुनते ही तुरंत रुक जाते थे। जब महिलाओं ने भगवान के मज़ाक को समझ लिया, तो उन्हें पता चला कि वह रोएँगे और फिर हरे कृष्ण मंत्र का जाप सुनकर रुक जाएँगे, तो उन्होंने सभी ने इसे हरे कृष्ण का जाप करने के लिए एक संकेत के रूप में लिया जैसे ही भगवान रोते। इस तरह यह एक नियमित कार्य बन गया। भगवान रोते थे, और महिलाएँ हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करना शुरू कर देती थीं, अपने हाथों को ताली बजाती हुईं। इस तरह पड़ोस के घरों की सभी महिलाएँ चौबीसों घंटे संकीर्तन आंदोलन में शामिल होने के लिए शचीमाता के घर में इकट्ठा होती थीं। जब तक महिलाएँ हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करती रहतीं, भगवान नहीं रोते थे लेकिन उन पर बहुत प्रसन्नता से मुस्कुराते थे।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥