तबे कत दिने प्रभुर जानु - चङ्क्रमण ।
नाना चमत्कार तथा कराइल दर्शन ॥21॥
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अनुवाद
कुछ दिनों के बाद प्रभु घुटनों के बल रेंगने लगे और उन्होंने अनेक अद्भुत चीजें दिखायीं।
After a few days, Mahaprabhu started crawling on his knees and started performing various miracles.
तात्पर्य
चैतन्य भागवत में वर्णित है कि एक दिन जब प्रभु अपने घुटनों के बल रेंग रहे थे, उनके कमर में घंटियाँ बहुत ही मधुर ध्वनि कर रही थीं, एक साँप प्रभु के आँगन में रेंगने आया, जिसे प्रभु ने एक जिज्ञासु बच्चे की तरह पकड़ लिया। तुरंत साँप ने उन पर कुंडली मार ली। एक बच्चे के रूप में प्रभु फिर साँप पर आराम करने लगे, और कुछ समय बाद साँप प्रभु को वहीं छोड़कर चला गया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥