सर्व - लोकेर करिबे इहँ धारण, पोषण ।
‘विश्वम्भर’ नाम इहार , - एइ त कारण ॥19॥
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अनुवाद
"भविष्य में यह बालक समस्त जगत की रक्षा और पालन करेगा। इसीलिए इसका नाम विश्वम्भर रखा गया है।"
"This child will protect and nurture the entire world in the future. Therefore, he will be called Vishvambhar."
तात्पर्य
चैतन्य भागवत में पुष्टि की गई है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने, अपने जन्म से, पूरे संसार को शांत बनाया है, जैसे कि अतीत में नारायण ने अपने अवतार के रूप में वराह में इस पृथ्वी की रक्षा की थी। इस काल-युग में इस संसार की रक्षा करने और उसे बनाए रखने के कारण, भगवान चैतन्य महाप्रभु को विश्वंभर के रूप में जाना जाता है, जो पूरे संसार का भरण-पोषण करता है। श्री चैतन्य महाप्रभु ने पांच सौ साल पहले जब ये मौजूद थे, तब उन्होंने जिस आंदोलन का उद्घाटन किया था, उसका फिर से पूरे संसार में प्रचार किया जा रहा है, और वास्तव में हम इसके व्यावहारिक परिणाम देख रहे हैं। लोगों को इस हरे कृष्ण आंदोलन द्वारा बचाया जा रहा है, उनकी रक्षा की जा रही है और उनका भरण-पोषण किया जा रहा है। हजारों अनुयायी, विशेष रूप से पश्चिमी युवा, इस हरे कृष्ण आंदोलन में भाग ले रहे हैं, और वे कितने सुरक्षित और खुश महसूस करते हैं, इसका अनुमान उनके सैंकड़ों और हजारों पत्रों में कृतज्ञता की अभिव्यक्ति से लगाया जा सकता है। विश्वंभर नाम का उल्लेख अथर्व-वेद-संहिता (3.3.16.5) में भी किया गया है: विश्वं भरो विश्वेन मा भरसा पाही स्वाहा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥