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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.14.18 
महोत्सव कर, सब बोलाह ब्राह्मण ।
आजि दिन भाल , - करिब नाम - करण ॥18॥
 
 
अनुवाद
"मैं एक नामकरण समारोह आयोजित करने का प्रस्ताव रखता हूँ। हमें एक उत्सव मनाना चाहिए और ब्राह्मणों को बुलाना चाहिए क्योंकि आज का दिन बहुत शुभ है।
 
I want to perform the naming ceremony. Let's celebrate and invite the Brahmins, as this is a very auspicious day.
तात्पर्य
यह एक वैदिक सिद्धांत है कि नारायण और ब्राह्मणों के सम्बन्ध से एक त्योहार मनाया जाना चाहिए। बच्चे को एक खास नाम देना दश-विध-संस्कार के रूप में जानी जाने वाली पवित्र प्रक्रियाओं में से एक है, और ऐसे समारोह के दिन नारायण की पूजा करके और प्रसाद वितरित करके एक त्योहार मनाया जाना चाहिए, मुख्य रूप से ब्राह्मणों के बीच।

जब नीलांबर चक्रवर्ती, शचीमाता और जगन्नाथ मिश्रा ने भगवान के कमल चरणों के निशान से समझा कि बच्चा निमाई कोई साधारण बच्चा नहीं बल्कि नारायण का अवतार है, तो उन्होंने तय किया कि उसी दिन, जो बहुत शुभ था, उन्हें उनके नामकरण समारोह के लिए एक त्योहार मनाना चाहिए। इस संबंध में हम विशेष रूप से देख सकते हैं कि कैसे भगवान के शरीर के लक्षणों, उनकी गतिविधियों और शास्त्रों की भविष्यवाणी से भगवान के अवतार का पता लगाया जाता है। वास्तविक प्रमाण से ही किसी व्यक्ति को भगवान का अवतार स्वीकार किया जा सकता है, न कि मनमाने ढंग से या बदमाशों और मूर्खों के वोट द्वारा। भगवान चैतन्य के प्रकट होने के बाद से बंगाल में कई नकली अवतार हुए हैं, लेकिन कोई भी निष्पक्ष भक्त या विद्वान समझ सकता है कि भगवान चैतन्य महाप्रभु को कृष्ण के अवतार के रूप में लोकप्रिय मतों के आधार पर नहीं बल्कि शास्त्रों और वास्तविक विद्वानों के साक्ष्य से स्वीकार किया गया था। यह साधारण लोग नहीं थे जिन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु को भगवान के रूप में स्वीकार किया था। शुरुआत में नीलांबर चक्रवर्ती जैसे विद्वान विद्वानों द्वारा उनकी पहचान की गई थी, और बाद में उनकी सभी गतिविधियों की पुष्टि छह गोस्वामियों, विशेष रूप से श्रील जीव गोस्वामी और श्रील रूप गोस्वामी, और कई अन्य विद्वान विद्वानों ने शास्त्र से साक्ष्य के साथ की थी। भगवान का अवतार उनके जीवन की शुरुआत से ही ऐसा होता है। ऐसा नहीं है कि ध्यान करने से व्यक्ति अचानक भगवान का अवतार बन सकता है। ऐसे झूठे अवतार मूर्खों और बदमाशों के लिए होते हैं, समझदार लोगों के लिए नहीं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)