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श्लोक 12
श्लोक
1.14.12
देखिया मिश्रेर हइल आनन्दित मति ।
गुप्ते बोलाइल नीलाम्बर चक्रवर्ती ॥12॥
अनुवाद
जब जगन्नाथ मिश्र ने अपने पुत्र के तलवे पर अद्भुत निशान देखे, तो वे बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने एकान्त में नीलाम्बर चक्रवर्ती को बुलाया।
When Jagannatha Mishra saw these wonderful marks on his son's soles, he was overjoyed and secretly sent for Nilambar Chakravarti.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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